श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.26.49 
परस्य द‍ृश्यते धर्मो ह्यपरस्मिन्समन्वयात् ।
अतो विशेषो भावानां भूमावेवोपलक्ष्यते ॥ ४९ ॥
 
 
अनुवाद
कारण अपने प्रभाव में भी विद्यमान रहता है, इसलिए पहले के लक्षण दूसरे में भी देखे जा सकते हैं। यही वजह है कि केवल पृथ्वी में ही सभी तत्वों की विशेषताएँ पाई जाती हैं।
 
Since the cause is present in its effect, the characteristics (qualities) of the first are also seen in the second. That is why the specialties of all the elements are found only in the earth.
तात्पर्य
आकाश का कारण शब्द है, आकाश का कारण वायु है, वायु का कारण अग्नि है, अग्नि का कारण जल है, और जल का कारण पृथ्वी है। आकाश में केवल शब्द है; वायु में शब्द और स्पर्श है; अग्नि में शब्द, स्पर्श और रूप है; जल में शब्द, स्पर्श, रूप और रस है; और पृथ्वी में शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध है। इसलिए पृथ्वी अन्य सभी तत्वों के गुणों का भंडार है। पृथ्वी अन्य सभी तत्वों का योग है। पृथ्वी में तत्वों के सभी पाँच गुण हैं, जल में चार गुण हैं, अग्नि में तीन, वायु में दो, और आकाश में केवल एक गुण, शब्द है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)