Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.26.48: वह इन्द्रिय जिसका ज्ञान का विषय अग्नि का रूप गुण है, वह नेत्र इन्द्रिय है। जल का स्वाद जिस इन्द्रिय का विषय है, उसे रसना इन्द्रिय कहते हैं। गंध जो पृथ्वी का विशिष्ट गुण है, जिस इंद्रिय द्वारा पहचाना जाता है उसे घ्राण इन्द्रिय कहते हैं। | bhagavat अध्याय 3.26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह इन्द्रिय जिसका ज्ञान का विषय अग्नि का रूप गुण है, वह नेत्र इन्द्रिय है। जल का स्वाद जिस इन्द्रिय का विषय है, उसे रसना इन्द्रिय कहते हैं। गंध जो पृथ्वी का विशिष्ट गुण है, जिस इंद्रिय द्वारा पहचाना जाता है उसे घ्राण इन्द्रिय कहते हैं।
The sense whose subject is the special quality of fire is the sense of sight. The sense whose subject is the special taste of water is called the sense of taste. The sense whose subject is the special quality of earth, smell, is called the sense of smell.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥