स एष प्रकृतिं सूक्ष्मां दैवीं गुणमयीं विभु: ।
यदृच्छयैवोपगतामभ्यपद्यत लीलया ॥ ४ ॥
अनुवाद
अपने मनोरंजन के रूप में, महानों से महान श्रीभगवान ने सूक्ष्म भौतिक शक्ति को स्वीकार किया जो त्रिगुणात्मक है और विष्णु से जुड़ी हुई है।
That greatest of all, Sri Bhagavan, accepted the subtle physical energy, which is triguna (three-fold) and is related to Vishnu, as His leela.
तात्पर्य
इस श्लोक में गुण-मायी शब्द बहुत महत्त्वपूर्ण है। दैवीं का अर्थ है "भगवान् के ऊर्जा का स्वरूप" और गुण-मायी का अर्थ है "तीनों प्रकार की भौतिक प्रकृति में निवेशित होना"। जब भगवान् की भौतिक ऊर्जा प्रकट होती है, तब यह गुण-मायी ऊर्जा तीन प्रकार के भौतिक प्रकृति की ऊर्जा के प्रकटीकरण के रूप में कार्य करती है; यह एक आवरण के रूप में कार्य करती है। भगवान् से उत्सर्जित होने वाली ऊर्जा दो प्रकार से प्रकट होती है - भगवान से एक उत्सर्जन के रूप में और भगवान के चेहरे की एक आवरण के रूप में। भगवद्गीता में यह कहा गया है कि क्योंकि पूरा संसार भौतिक प्रकृति के तीनों प्रकारों द्वारा भ्रमित है, इसलिए साधारण सभी शर्तों में बंधी हुई आत्मा, ऐसी ऊर्जा द्वारा आच्छादित होने के कारण, भगवान को नहीं देख सकती है। बादल का उदाहरण बहुत ही अच्छे से दिया गया है। अचानक आकाश में एक बहुत बड़ा बादल दिखाई दे सकता है। इस बादल को हम दो तरह से देखते हैं। सूर्य के लिए बादल इसकी ऊर्जा की सृष्टि है, लेकिन साधारण सभी शर्तों में बंधी हुई आत्मा के लिए यह आँखों के लिए एक आवरण है; बादल के कारण, सूर्य को नहीं देखा जा सकता है। ऐसा नहीं है कि बादल द्वारा सूर्य वास्तव में आच्छादित है; केवल साधारण व्यक्ति की दृष्टि ढकी हुई है। इसी तरह, यद्यपि माया भगवान को आच्छादित नहीं कर सकती है, जो माया से परे हैं, भौतिक ऊर्जा साधारण जीवित संस्थाओं को आच्छादित करती है। वो सभी शर्तों में बंधी हुई आत्माएँ जो आच्छादित हैं, व्यक्तिगत जीवित संस्थाएँ हैं, और वह जिसकी ऊर्जा से माया उत्पन्न हुई है, भगवान हैं। श्रीमद्भागवतम् में एक अन्य जगह, प्रथम स्कंध, सातवें अध्याय में, यह कहा गया है कि व्यासदेव ने अपनी आध्यात्मिक दृष्टि से, भगवान और भौतिक ऊर्जा को उनके पीछे खड़ा देखा। यह इंगित करता है कि भौतिक ऊर्जा भगवान को नहीं ढँक सकती है, जैसे अंधकार सूर्य को नहीं ढँक सकता है। अंधकार एक क्षेत्र को ढँक सकता है जो सूर्य की तुलना में बहुत महत्वहीन है। अँधेरा एक छोटी सी गुफा को ढक सकता है, लेकिन खुले आसमान को नहीं। इसी प्रकार, भौतिक ऊर्जा की आवरण क्षमता सीमित है और भगवान पर कार्य नहीं कर सकती है, इसलिए उन्हें विष्णु कहा जाता है। जैसे बादल की उपस्थिति सूर्य द्वारा स्वीकार की जाती है, वैसे ही एक निश्चित अंतराल पर भौतिक ऊर्जा की उपस्थिति भगवान द्वारा स्वीकार की जाती है। यद्यपि उनकी भौतिक ऊर्जा का उपयोग भौतिक दुनिया को बनाने के लिए किया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह ऊर्जा द्वारा आच्छादित हैं। जो लोग भौतिक ऊर्जा से आच्छादित हैं, उन्हें सभी शर्तों में बंधी हुई आत्मा कहा जाता है। भगवान निर्माण, रखरखाव और विघटन में अपने भौतिक मनोरंजन के लिए भौतिक ऊर्जा को स्वीकार करते हैं। लेकिन सभी शर्तों में बंधी हुई आत्मा आच्छादित है; वह यह समझ नहीं सकता है कि इस भौतिक ऊर्जा से परे, भगवान है, जो सभी कारणों का कारण है, जैसे एक कम बुद्धिमान व्यक्ति यह नहीं समझ सकता है कि बादलों के आवरण से परे तेज धूप है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥