श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.26.36 
मृदुत्वं कठिनत्वं च शैत्यमुष्णत्वमेव च ।
एतत्स्पर्शस्य स्पर्शत्वं तन्मात्रत्वं नभस्वत: ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
कोमलता और कठोरता, सर्दी और गर्मी - ये सभी स्पर्श के गुण हैं, जिन्हें वायु के सूक्ष्म रूप के रूप में जाना जाता है।
 
Softness and hardness, coldness and heat—these are the characteristics of touch, which are observed in the subtle form of air.
तात्पर्य
आकार का प्रमाण स्पर्श होता है। वास्तव में, वस्तुओं को दो अलग-अलग तरीकों से समझा जाता है। वे या तो नरम या कठोर, ठंडे या गर्म आदि होते हैं। स्पर्श संवेदना की यह मूर्त क्रिया आकाश से उत्पन्न होने वाली वायु के विकास का परिणाम है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)