मन, इंद्रियाँ और प्राण शक्ति या जीवित सत्ता के रूप होते हैं, यद्यपि वे नग्न आंखों से दिखाई नहीं देती हैं। रूप आकाश में सूक्ष्म अस्तित्व में रहता है और आंतरिक रूप से इसे शरीर के भीतर शिराओं और प्राण वायु परिसंचरण के रूप में माना जाता है। बाह्य रूप से संवेदनाओं की अदृश्य रूप होते हैं। अदृश्य संवेदनाओं का उत्पादन अव्यक्त तत्व की बाह्य क्रिया है और प्राण वायु और रक्त का परिसंचरण उसकी आंतरिक क्रिया है। आकाश में सूक्ष्म रूप मौजूद होते हैं यह टेलीविजन के प्रसारण द्वारा आधुनिक विज्ञान द्वारा सिद्ध किया गया है, जिसके द्वारा एक स्थान के रूप या तस्वीरें उस अव्यक्त तत्व की क्रिया द्वारा दूसरे स्थान तक प्रेषित की जाती हैं। वह यहाँ बहुत अच्छी तरह से समझाया गया है। यह श्लोक महान वैज्ञानिक शोध कार्य का संभावित आधार है, क्योंकि यह बताता है कि अव्यक्त तत्व से सूक्ष्म रूप कैसे उत्पन्न होते हैं, उनकी विशेषताएँ और कार्य क्या हैं, और कैसे मूर्त तत्व, अर्थात् वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी, सूक्ष्म रूप से प्रकट होते हैं। मानसिक गतिविधियाँ, या सोचने, महसूस करने और चाहने की मनोवैज्ञानिक क्रियाएँ भी ईथर अस्तित्व के मंच पर गतिविधियाँ हैं। भगवद्-गीता में दिया गया कथन कि मृत्यु के समय मानसिक स्थिति अगले जन्म का आधार है, इस श्लोक में भी इसकी पुष्टि की गई है। सूक्ष्म रूप से स्थूल तत्वों के दूषण या विकास के कारण अवसर मिलते ही मानसिक अस्तित्व मूर्त रूप में परिवर्तित हो जाता है।
