यद्विदुर्ह्यनिरुद्धाख्यं हृषीकाणामधीश्वरम् ।
शारदेन्दीवरश्यामं संराध्यं योगिभि: शनै: ॥ २८ ॥
अनुवाद
जीवात्मा का मन, जिसे परम इंद्रियाधिपति अनिरुद्ध के नाम से जाना जाता है, एक नील-श्याम काया है जो शरद ऋतु के कमल के समान प्रतीत होती है। योगी उसे धीरे-धीरे प्राप्त करते हैं।
The mind of the soul is known as Aniruddha, the supreme lord of the senses. His dark blue body is like the autumn lotus. Yogis attain him gradually.
तात्पर्य
योग प्रणाली मन को वश में रखने पर जोर देती है और मन का स्वामी अनिरुद्ध है। कहा जाता है अनिरुद्ध चार हाथों वाले हैं और सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमल के फूल लिए हुए हैं। विष्णु के चौबीस रूप हैं, प्रत्येक नाम अलग-अलग हैं। इन चौबीस रूपों में से संकर्षण, अनिरुद्ध, प्रद्युम्न और वासुदेव का वर्णन चैतन्य-चरितामृत में बहुत ही सुंदर तरीके से किया गया है, जहां कहा गया है अनिरुद्ध की पूजा योगीगण करते हैं। शून्यता पर ध्यान किसी विचारशील की उपजाऊ बुद्धि का आधुनिक आविष्कार है। वास्तव में, योग ध्यान की प्रक्रिया जैसे इस पद में उल्लेखित है वह अनिरुद्ध के रूप पर होनी चाहिए। अनिरुद्ध पर ध्यान करने से व्यक्ति स्वीकृति और अस्वीकृति के आंदोलन से मुक्त हो सकता है। जब व्यक्ति का मन अनिरुद्ध पर स्थिर होता है, वह क्रमिक रूप से ईश्वर के प्रति सचेत हो जाता है, वह कृष्ण चेतना की शुद्ध स्थिति प्राप्त करता है, जो योग का परम लक्ष्य है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥