व्यक्ति को न केवल शुद्ध कृष्ण चेतना की अवस्था में आना चाहिए, बल्कि उसे बहुत सावधान भी रहना चाहिए। कोई भी असावधानी या लापरवाही पतन का कारण बन सकती है। यह पतन मिथ्या अहंकार के कारण होता है। शुद्ध चेतना की अवस्था से, स्वतंत्रता के दुरुपयोग के कारण मिथ्या अहंकार पैदा होता है। हम इस बारे में तर्क नहीं दे सकते कि शुद्ध चेतना से मिथ्या अहंकार क्यों पैदा होता है। तथ्यतः, यह होने की संभावना हमेशा बनी रहती है, और इसलिए सावधानी बरतनी होती है। मिथ्या अहंकार सभी भौतिक गतिविधियों का मूल सिद्धांत है, जो भौतिक प्रकृति के गुणों में निष्पादित की जाती हैं। जैसे ही कोई शुद्ध कृष्ण चेतना से विचलित होता है, वह भौतिक प्रतिक्रिया में अपनी उलझन बढ़ाता है। भौतिकवाद की उलझन भौतिक मन है, और इस भौतिक मन से इंद्रियाँ और भौतिक अंग प्रकट होते हैं।
