यदि आत्मा भक्ति सेवा की आध्यात्मिक गतिविधियों में संलग्न हो जाती है, तो वह जन्म और मृत्यु के मंच से पूरी तरह से मुक्त हो जाती है। उसकी अगली स्थिति भौतिक शरीर से पूर्ण आध्यात्मिक स्वतंत्रता है। मृत्यु का भय काल या समय कारक की क्रिया है, जो भगवान की सर्वोच्च व्यक्तित्व के प्रभाव का प्रतिनिधित्व करता है। दूसरे शब्दों में, समय विनाशकारी है। जो कुछ भी बनाया जाता है वह विनाश और विघटन के अधीन होता है, जो समय की क्रिया है। समय भगवान का प्रतिनिधित्व है, और यह हमें यह भी याद दिलाता है कि हमें भगवान के प्रति समर्पण करना चाहिए। भगवान प्रत्येक बद्ध आत्मा से समय के रूप में बात करते हैं। वह भगवद-गीता में कहते हैं कि अगर कोई उनके प्रति समर्पण करता है, तो जन्म और मृत्यु की कोई समस्या नहीं रह जाती। इसलिए हमें समय कारक को भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के रूप में स्वीकार करना चाहिए जो हमारे सामने खड़ा है। इसे आगे निम्नलिखित श्लोक में समझाया गया है।
