श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.26.11 
पञ्चभि: पञ्चभिर्ब्रह्म चतुर्भिर्दशभिस्तथा ।
एतच्चतुर्विंशतिकं गणं प्राधानिकं विदु: ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
पांच स्थूल तत्व, पांच सूक्ष्म तत्व, चार अंतःकरण, पांच ज्ञानेंद्रियाँ और पाँच कर्मेंद्रियाँ इन चौबीस तत्वों का समूह प्रधान कहलाता है।
 
This group of twenty-four elements, consisting of five gross elements, five subtle elements, four inner senses, five sense organs and five action organs, is called Pradhan.
तात्पर्य
भगवद्-गीता के अनुसार, यहाँ वर्णित चौबीस तत्वों के योग को योनिर महण ब्रह्म कहा जाता है। जीवित संस्थाओं का योग इस योनिर महण ब्रह्म में निहित है, और वे ब्रह्मा से लेकर तुच्छ चींटी तक विभिन्न रूपों में पैदा होते हैं। श्रीमद्-भागवतम और अन्य वैदिक साहित्य में, चौबीस तत्वों, प्रधान का योग भी योनिर महण ब्रह्म के रूप में वर्णित है; यह सभी जीवित संस्थाओं के जन्म और निर्वाह का स्रोत है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)