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bhagavat 3.24.7: जब वह पृथ्वी पर अवतरित हो रहे थे, तब आकाश में देवताओं ने वाद्ययंत्रों के रूप में वर्षा के मेघों को बजाया। स्वर्गीय संगीतज्ञ, गंधर्व भगवान की महिमा का गुणगान करने लगे, जबकि अप्सरा कहलाने वाली स्वर्गीय नर्तकियाँ हर्षित होकर नाचने लगीं।   |   bhagavat अध्याय 3.24: कर्दम मुनि का वैराग्य   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.24.7 
अवादयंस्तदा व्योम्नि वादित्राणि घनाघना: ।
गायन्ति तं स्म गन्धर्वा नृत्यन्त्यप्सरसो मुदा ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जब वह पृथ्वी पर अवतरित हो रहे थे, तब आकाश में देवताओं ने वाद्ययंत्रों के रूप में वर्षा के मेघों को बजाया। स्वर्गीय संगीतज्ञ, गंधर्व भगवान की महिमा का गुणगान करने लगे, जबकि अप्सरा कहलाने वाली स्वर्गीय नर्तकियाँ हर्षित होकर नाचने लगीं।
 
At the time of His descent on earth, the gods in the sky played musical instruments using the rain-bearing clouds as instruments. The celestial singers, the Gandharvas, sang the glories of the Lord and the celestial dancers, known as Apsaras, danced in ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)