कर्दम मुनि ने वेदों के इस आदेश का पालन किया कि संन्यास जीवन में किसी भी व्यक्ति का स्त्रियों से कोई भी रिश्ता नहीं हो सकता। परन्तु उस महिला की स्थिति क्या है जिसे उसके पति ने छोड़ दिया है? वह पुत्र के संरक्षण में होती है और पुत्र यह वचन देता है कि वह अपनी माता को बंधनों से मुक्त करायेगा। महिला को संन्यास ग्रहण करने की अनुमति नहीं है। स्त्री को संन्यास देने के लिए आधुनिक युग में कुछ तथाकथित आध्यात्मिक संस्थाओं ने संन्यास का आविष्कार किया है जिसके लिए वेदों में कोई अनुमति नहीं है। नहीं तो, अगर इसकी अनुमति होती, तो कर्दम मुनि अपनी पत्नी को साथ ले जाकर उसे संन्यास दे सकते थे। महिला को घर पर रहना चाहिए। उसके जीवन में केवल तीन अवस्थाएँ होती हैं : बचपन में अपने पिता पर निर्भरता, जवानी में अपने पति पर निर्भरता और बुढ़ापे में अपने बड़े हुए पुत्र पर निर्भरता। बुढ़ापे में महिला की प्रगति उसके बड़े हुए पुत्र पर निर्भर करती है। आदर्श पुत्र कपिल मुनि अपने पिता को अपनी माता की मुक्ति का आश्वासन देते हैं ताकि उनके पिता उनकी अच्छी पत्नी के लिए चिन्ता किये बिना शांति से जा सकें।
