स्वीयं वाक्यमृतं कर्तुमवतीर्णोऽसि मे गृहे ।
चिकीर्षुर्भगवान् ज्ञानं भक्तानां मानवर्धन: ॥ ३० ॥
अनुवाद
कर्दम मुनि ने कहा- हे प्रभु! आप सदा अपने भक्तों के सम्मान को बढ़ाते हैं और मेरे घर में पधारने का कारण भी यही है कि आप अपने वचनों का पालन करें और वास्तविक ज्ञान का प्रसार करें।
The sage Kardama said: O my dear Lord, who always honours His devotees, You have appeared in my house only to fulfil Your promises and to spread true knowledge.
तात्पर्य
जब प्रभु कार्दम मुनि के पास उनके परिपक्व योग साधना के बाद प्रकट हुए, उन्होंने वादा किया कि वह कार्दाम के पुत्र बनेंगे। उस वादे को पूर्ण करने के लिए वह कार्दम मुनि के पुत्र के रूप में अवतरित हुए। उनके अवतरण का एक और उद्देश्य है चिकीर्षुर भगवान ज्ञानम्, ज्ञान का वितरण करना। इसलिए उन्हें भक्तानाम् मान-वर्धनः, "वह जो अपने भक्तों का मान बढ़ाता है" कहा जाता है। सांख्य का वितरण करके वह भक्तों का मान बढ़ाएँगे; इसलिए सांख्य दर्शन शुष्क मानसिक कल्पना नहीं है। सांख्य दर्शन का अर्थ है भक्ति सेवा। सांख्य भक्ति सेवा के लिए नहीं है तो भक्तों का मान कैसे बढ़ सकता है? भक्तों को सैद्धांतिक ज्ञान में कोई रुचि नहीं है; इसलिए कपिल मुनि द्वारा प्रतिपादित सांख्य का उद्देश्य भक्ति सेवा में दृढ़ रूप से स्थापित करना है। वास्तविक ज्ञान और वास्तविक मुक्ति भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के समक्ष आत्मसमर्पण करना और भक्ति सेवा में संलग्न होना है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥