ब्रह्माजी ने कहा: हे मेरे प्यारे पुत्र कर्दम, चूँकि तुमने मेरे उपदेशों का आदर करते हुए बिना किसी कपट के उनका पालन किया है, इस प्रकार तुमने मेरी अच्छी तरह से पूजा की है। तुमने मेरे सारे उपदेशों का पालन किया है और ऐसा करके तुमने मेरा सम्मान किया है।
Brahma said: Dear son Kardama, since you have accepted my teachings with respect and without any duality, you have worshipped me properly. You have followed all my teachings, by doing so you have respected me.
तात्पर्य
भगवान ब्रह्मा संपूर्ण ब्रह्मांड में प्रथम जीवधारी होने के कारण सभी के अध्यात्मिक गुरु माने जाते हैं, और वे सभी प्राणियों के पिता और निर्माता भी हैं। कर्दम मुनि प्रजापति अर्थात जीवों के निर्माताओं में से एक हैं, तथा वे ब्रह्मा के पुत्र भी हैं। ब्रह्मा ने कर्दम की प्रशंसा इसलिए की क्योंकि उन्होंने अध्यात्मिक गुरु के सभी आदेशों का तन-मन-धन से और बिना किसी छल-कपट के पालन किया। भौतिक जगत में एक संबद्ध आत्मा में छल-कपट करने की अयोग्यता होती है। उसके पास चार अयोग्यताएँ होती हैं: वह निश्चित रूप से गलती करेगा, वह निश्चित रूप से भ्रमित होगा, वह दूसरों को धोखा देने के लिए प्रवृत्त होगा, और उसकी इंद्रियाँ अपूर्ण होंगी। लेकिन यदि कोई शिष्य-परंपरा या परंपरा प्रणाली में अध्यात्मिक गुरु के आदेश का पालन करता है, तो वह चारों दोषों पर विजय प्राप्त कर लेता है। इसलिए, सच्चे अध्यात्मिक गुरु से प्राप्त ज्ञान छल-कपट नहीं है। संबद्ध आत्मा द्वारा निर्मित कोई भी अन्य ज्ञान केवल छल-कपट ही है। ब्रह्मा अच्छी तरह से जानते थे कि कर्दम मुनि ने उनसे प्राप्त निर्देशों का ठीक-ठीक पालन किया और उन्होंने वास्तव में अपने अध्यात्मिक गुरु का सम्मान किया। अध्यात्मिक गुरु का सम्मान करने का अर्थ है उनके निर्देशों का शब्द-दर-शब्द पालन करना।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥