| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 23: देवहूति का शोक » श्लोक 9 |
|
| | | | श्लोक 3.23.9  | एवं ब्रुवाणमबलाखिलयोगमाया-
विद्याविचक्षणमवेक्ष्य गताधिरासीत् ।
सम्प्रश्रयप्रणयविह्वलया गिरेषद्-
व्रीडावलोकविलसद्धसिताननाह ॥ ९ ॥ | | | | | | अनुवाद | | सम्पूर्ण प्रकार के अलौकिक ज्ञान में सबसे श्रेष्ठ, अपने पति को बोलते हुए सुनकर भोली देवहूति अति प्रसन्न हुई, उनका मुँह संकोच भरी नज़र और सुन्दर मुस्कान से खिल उठा और अत्यन्त शालीनता और प्रेम के कारण (भरे गले से) वो रुँधे कण्ठ में बोली। | | | | सम्पूर्ण प्रकार के अलौकिक ज्ञान में सबसे श्रेष्ठ, अपने पति को बोलते हुए सुनकर भोली देवहूति अति प्रसन्न हुई, उनका मुँह संकोच भरी नज़र और सुन्दर मुस्कान से खिल उठा और अत्यन्त शालीनता और प्रेम के कारण (भरे गले से) वो रुँधे कण्ठ में बोली। | | ✨ ai-generated | | |
|
|