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श्लोक 3.23.53  |
एतावतालं कालेन व्यतिक्रान्तेन मे प्रभो ।
इन्द्रियार्थप्रसङ्गेन परित्यक्तपरात्मन: ॥ ५३ ॥ |
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| अनुवाद |
| अब तक तो हमने परमेश्वर के ज्ञान का अनुशीलन न करते हुए अपना पूरा समय इन्द्रियसुख में व्यर्थ ही गँवा दिया है। |
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| अब तक तो हमने परमेश्वर के ज्ञान का अनुशीलन न करते हुए अपना पूरा समय इन्द्रियसुख में व्यर्थ ही गँवा दिया है। |
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