श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.23.51 
देवहूतिरुवाच
सर्वं तद्भगवान्मह्यमुपोवाह प्रतिश्रुतम् ।
अथापि मे प्रपन्नाया अभयं दातुमर्हसि ॥ ५१ ॥
 
 
अनुवाद
देवहूति जी ने कहा- हे स्वामी, आपने जितने वचन दिए थे, वे सब पूरे हुए, लेकिन मैं आपकी शरण में आई हूँ इसलिए मुझे निडरता का भी वरदान दें।
 
देवहूति जी ने कहा- हे स्वामी, आपने जितने वचन दिए थे, वे सब पूरे हुए, लेकिन मैं आपकी शरण में आई हूँ इसलिए मुझे निडरता का भी वरदान दें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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