श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.23.49 
पतिं सा प्रव्रजिष्यन्तं तदालक्ष्योशतीबहि: ।
स्मयमाना विक्लवेन हृदयेन विदूयता ॥ ४९ ॥
 
 
अनुवाद
जब उसने देखा कि उसके पति घर छोड़कर जा रहे हैं, तो वह ऊपर से मुस्कुराई पर अंदर से वह बहुत व्याकुल और दुखी थी।
 
जब उसने देखा कि उसके पति घर छोड़कर जा रहे हैं, तो वह ऊपर से मुस्कुराई पर अंदर से वह बहुत व्याकुल और दुखी थी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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