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श्लोक 3.23.43  |
प्रेक्षयित्वा भुवो गोलं पत्न्यै यावान् स्वसंस्थया ।
बह्वाश्चर्यं महायोगी स्वाश्रमाय न्यवर्तत ॥ ४३ ॥ |
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| अनुवाद |
| विश्व के गोलक और उसकी रचना को अपनी पत्नी को दिखाकर महान योगी कर्दम मुनि धरती पर अपने आश्रम में लौट आए। |
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| विश्व के गोलक और उसकी रचना को अपनी पत्नी को दिखाकर महान योगी कर्दम मुनि धरती पर अपने आश्रम में लौट आए। |
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