|
| |
| |
श्लोक 3.23.35  |
भर्तु: पुरस्तादात्मानं स्त्रीसहस्रवृतं तदा ।
निशाम्य तद्योगगतिं संशयं प्रत्यपद्यत ॥ ३५ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| अपने पति की मौजूदगी में हज़ारों दासियों से घिरी हुई देखकर और पति की योगशक्ति देखकर वह अत्यंत विस्मित थी। |
| |
| अपने पति की मौजूदगी में हज़ारों दासियों से घिरी हुई देखकर और पति की योगशक्ति देखकर वह अत्यंत विस्मित थी। |
| ✨ ai-generated |
| |
|