श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.23.35 
भर्तु: पुरस्तादात्मानं स्त्रीसहस्रवृतं तदा ।
निशाम्य तद्योगगतिं संशयं प्रत्यपद्यत ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
अपने पति की मौजूदगी में हज़ारों दासियों से घिरी हुई देखकर और पति की योगशक्ति देखकर वह अत्यंत विस्मित थी।
 
अपने पति की मौजूदगी में हज़ारों दासियों से घिरी हुई देखकर और पति की योगशक्ति देखकर वह अत्यंत विस्मित थी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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