श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.23.27 
तां दृष्ट्वा सहसोत्थाय प्रोचु: प्राञ्जलय: स्त्रिय: ।
वयं कर्मकरीस्तुभ्यं शाधि न: करवाम किम् ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
इसे देख, उन युवतियों ने अचानक से खड़ी होकर हाथ जोड़कर कहा, "हम आपकी दासी हैं। कृपा करके बताएँ कि हम आपके लिए क्या कर सकती हैं?"
 
इसे देख, उन युवतियों ने अचानक से खड़ी होकर हाथ जोड़कर कहा, "हम आपकी दासी हैं। कृपा करके बताएँ कि हम आपके लिए क्या कर सकती हैं?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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