श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.23.26 
सान्त:सरसि वेश्मस्था: शतानि दश कन्यका: ।
सर्वा: किशोरवयसो ददर्शोत्पलगन्धय: ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
सरोवर के भीतर एक घर में उसने एक हज़ार कन्याएँ देखीं जो सब अपनी युवावस्था में थीं और कमल के फूलों की तरह सुगंधित थीं।
 
सरोवर के भीतर एक घर में उसने एक हज़ार कन्याएँ देखीं जो सब अपनी युवावस्था में थीं और कमल के फूलों की तरह सुगंधित थीं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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