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श्लोक 3.23.24  |
सा तद्भर्तु: समादाय वच: कुवलयेक्षणा ।
सरजं बिभ्रती वासो वेणीभूतांश्च मूर्धजान् ॥ २४ ॥ |
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| अनुवाद |
| कमलनयनी देवहूति ने अपने पति का आदेश मान लिया। गंदे वस्त्रों और सिर के जटायुक्त बालों के कारण वे आकर्षक नहीं लग रही थीं। |
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| कमलनयनी देवहूति ने अपने पति का आदेश मान लिया। गंदे वस्त्रों और सिर के जटायुक्त बालों के कारण वे आकर्षक नहीं लग रही थीं। |
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