श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.23.24 
सा तद्भर्तु: समादाय वच: कुवलयेक्षणा ।
सरजं बिभ्रती वासो वेणीभूतांश्च मूर्धजान् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
कमलनयनी देवहूति ने अपने पति का आदेश मान लिया। गंदे वस्त्रों और सिर के जटायुक्त बालों के कारण वे आकर्षक नहीं लग रही थीं।
 
कमलनयनी देवहूति ने अपने पति का आदेश मान लिया। गंदे वस्त्रों और सिर के जटायुक्त बालों के कारण वे आकर्षक नहीं लग रही थीं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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