जब उन्होंने देखा कि देवहूति इतने विशाल और ऐश्वर्ययुक्त प्रासाद को नापसंदगी भरी दृष्टि से निहार रही हैं, तो कर्दम मुनि को उनके मन की स्थिति का अहसास हो गया, क्योंकि वे किसी के भी हृदय की बात समझ सकते थे। इसलिए उन्होंने स्वयं अपनी पत्नी को इस प्रकार संबोधित किया।
When he saw that Devahūti was looking at such a huge, luxurious palace with an unhappy heart, sage Kardama came to know her feelings, for he could read one's heart. So he himself addressed his wife in this manner.
तात्पर्य
देवहूति ने आश्रम में बहुत समय बिताया था, अपने शरीर की ज़्यादा देखभाल नहीं करती थी। वह मैल से ढकी हुई थी, और उसके कपड़े ज़्यादा अच्छे नहीं थे। कर्दम मुनि हैरान थे कि वह ऐसा महल कैसे बना सकते हैं, और इसी तरह उनकी पत्नी, देवहूति, भी हैरान थी। वह उस भव्य महल में कैसे रह सकती थी? कर्दम मुनि उनकी हैरानी समझ सकते थे, और इसलिए उन्होंने इस प्रकार कहा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)