श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.23.21 
विहारस्थानविश्रामसंवेशप्राङ्गणाजिरै: ।
यथोपजोषं रचितैर्विस्मापनमिवात्मन: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
उस प्रासाद के भीतर आमोद-प्रमोद के लिए जगह, विश्राम के लिए कक्ष, शयन के लिए शयनकक्ष, भीतरी और बाहरी आँगन थे जो देखने में बेहद सुहावने थे। यह सब देखकर स्वयं मुनि को भी आश्चर्य हो रहा था।
 
उस प्रासाद के भीतर आमोद-प्रमोद के लिए जगह, विश्राम के लिए कक्ष, शयन के लिए शयनकक्ष, भीतरी और बाहरी आँगन थे जो देखने में बेहद सुहावने थे। यह सब देखकर स्वयं मुनि को भी आश्चर्य हो रहा था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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