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bhagavat 3.23.18: वह महल बेहद खूबसूरत था, उसके द्वारों की देहली मूँगे की थी और दरवाजे हीरों-जवाहरातों से सजे हुए थे। नीलमणि मणियों से बने गुंबदों पर सोने के कलश सजाए हुए थे।   |   bhagavat अध्याय 3.23: देवहूति का शोक   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.23.18 
द्वा:सु विद्रुमदेहल्या भातं वज्रकपाटवत् ।
शिखरेष्विन्द्रनीलेषु हेमकुम्भैरधिश्रितम् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
वह महल बेहद खूबसूरत था, उसके द्वारों की देहली मूँगे की थी और दरवाजे हीरों-जवाहरातों से सजे हुए थे। नीलमणि मणियों से बने गुंबदों पर सोने के कलश सजाए हुए थे।
 
That palace was extremely beautiful, its door thresholds were made of coral and the doors were studded with diamonds. There were gold urns placed on the domes made of sapphire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)