| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 23: देवहूति का शोक » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 3.23.16  | उपर्युपरि विन्यस्तनिलयेषु पृथक्पृथक् ।
क्षिप्तै: कशिपुभि: कान्तं पर्यङ्कव्यजनासनै: ॥ १६ ॥ | | | | | | अनुवाद | | सात अलग-अलग मंजिलों पर शय्याओं, पलंगों, पंखों और आसनों से सुसज्जित होने के कारण यह महल अत्यंत मनमोहक लग रहा था। | | | | सात अलग-अलग मंजिलों पर शय्याओं, पलंगों, पंखों और आसनों से सुसज्जित होने के कारण यह महल अत्यंत मनमोहक लग रहा था। | | ✨ ai-generated | | |
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