श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.23.13 
सर्वकामदुघं दिव्यं सर्वरत्नसमन्वितम् ।
सर्वर्द्ध्युपचयोदर्कं मणिस्तम्भैरुपस्कृतम् ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
यह विभिन्न प्रकार के बहुमूल्य रत्नों से जटी हुई, कीमती पत्थरों के खंभों से सजी हुई और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली आश्चर्यजनक संरचना थी। यह हर प्रकार के साज-सामान और धन-संपत्ति से सुसज्जित थी, जो समय के साथ बढ़ती ही जाती थी।
 
यह विभिन्न प्रकार के बहुमूल्य रत्नों से जटी हुई, कीमती पत्थरों के खंभों से सजी हुई और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली आश्चर्यजनक संरचना थी। यह हर प्रकार के साज-सामान और धन-संपत्ति से सुसज्जित थी, जो समय के साथ बढ़ती ही जाती थी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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