|
| |
| |
श्लोक 3.23.1  |
मैत्रेय उवाच
पितृभ्यां प्रस्थिते साध्वी पतिमिङ्गितकोविदा ।
नित्यं पर्यचरत्प्रीत्या भवानीव भवं प्रभुम् ॥ १ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| मैत्रेय ने कहा- अपने माता-पिता के देह त्याग के पश्चात अपने पति की इच्छाओं को समझनेवाली पतिव्रता देवहूति अपने पति की प्रतिदिन प्रेमपूर्वक सेवकाई करने लगी जैसे भगवान शिव की पत्नी भवानी अपने पति शिव जी की करती हैं। |
| |
| मैत्रेय ने कहा- अपने माता-पिता के देह त्याग के पश्चात अपने पति की इच्छाओं को समझनेवाली पतिव्रता देवहूति अपने पति की प्रतिदिन प्रेमपूर्वक सेवकाई करने लगी जैसे भगवान शिव की पत्नी भवानी अपने पति शिव जी की करती हैं। |
| ✨ ai-generated |
| |
|