श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 22: कर्दममुनि तथा देवहूति का परिणय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.22.39 
एतत्त आदिराजस्य मनोश्चरितमद्भुतम् ।
वर्णितं वर्णनीयस्य तदपत्योदयं श‍ृणु ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुमसे आदि सम्राट स्वायंभुव मनु के अद्भुत चरित्र का वर्णन किया है। उनकी ख्याति वर्णन के योग्य है। अब उनकी पुत्री देवहूति के अभ्युदय का वर्णन ध्यान से सुनो।
 
I have described to you the wonderful character of the first emperor Svayambhuva Manu. His fame is worth describing. Now listen carefully to the description of the rise of his daughter Devahuti.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध तीन के अंतर्गत बाईसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)