तत्त्राणायासृजच्चास्मान् दो:सहस्रात्सहस्रपात् ।
हृदयं तस्य हि ब्रह्म क्षत्रमङ्गं प्रचक्षते ॥ ३ ॥
अनुवाद
ब्राह्मणों की सुरक्षा के लिए हज़ार पाँव वाले महान व्यक्ति ने हम क्षत्रियों को अपनी हज़ार बाहों से रचा। इसलिए ब्राह्मण उनका हृदय हैं और क्षत्रिय उनकी भुजाएँ हैं।
To protect the Brahmins, the Sahasra-Pad Virat Purush created us Kshatriyas from his thousand arms. Hence, Brahmins are called his heart and Kshatriyas are called his arms.
तात्पर्य
क्षत्रिय विशेष रूप से ब्राह्मणों का रक्षण करने के लिए होते हैं क्योंकि अगर ब्राह्मणों को संरक्षित किया जाता है तो सभ्यता का सिर ही संरक्षित हो जाता है। ब्राह्मण समाज के सिर होते हैं; अगर सिर स्वस्थ है और उसमें विकृति नहीं है तो सब कुछ उचित स्थान पर है। भगवान का वर्णन इस प्रकार है: नमो ब्रह्मण्य-देवाय गो-ब्राह्मणा-हिताय च। इस प्रार्थना का तात्पर्य यह है कि भगवान विशेष रूप से ब्राह्मणों और गायों की रक्षा करते हैं, और तभी वे समाज के सभी अन्य सदस्यों की रक्षा करते हैं (जगद्-हिताय)। यह उनकी इच्छा है कि सार्वभौमिक कल्याण कार्य गायों और ब्राह्मणों की रक्षा पर निर्भर करता है; इस प्रकार ब्राह्मण संस्कृति और गौ संरक्षण मानव सभ्यता के मूल सिद्धांत हैं। क्षत्रिय विशेष रूप से ब्राह्मणों की रक्षा करने के लिए हैं, जैसा कि भगवान की सर्वोच्च इच्छा है: गो-ब्राह्मण-हिताय च। जिस प्रकार शरीर में हृदय एक बहुत महत्वपूर्ण अंग होता है, उसी प्रकार ब्राह्मण भी मानव समाज में एक महत्वपूर्ण तत्व होते हैं। क्षत्रिय पूरे शरीर के समान हैं; भले ही पूरा शरीर हृदय से बड़ा होता है, लेकिन हृदय अधिक महत्वपूर्ण होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥