श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 22: कर्दममुनि तथा देवहूति का परिणय  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.22.25 
अशक्नुवंस्तद्विरहं मुञ्चन् बाष्पकलां मुहु: ।
आसिञ्चदम्ब वत्सेति नेत्रोदैर्दुहितु: शिखा: ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
सम्राट अपनी प्यारी बेटी के दूर जाने के दुःख को सहन नहीं कर सके। बार-बार उनकी आँखों से आँसू झरने लगे। वो आँसू बेटी के सिर पर गिर रहे थे और उसे भीग रहे थे। सम्राट विलाप कर रहे थे, "मेरी माँ, मेरी प्यारी बेटी!"
 
The emperor could not bear the separation from his daughter, so tears started flowing from his eyes repeatedly and his daughter's head got wet. He cried out 'My mother, my dear daughter.'
तात्पर्य
अम्बा शब्द महत्वपूर्ण है। एक पिता कभी-कभी अपनी बेटी को प्यार से "माँ" और कभी-कभी "मेरे प्यारे" कहकर संबोधित करता है। अलगाव की भावना इसलिए होती है क्योंकि जब तक बेटी की शादी नहीं हो जाती, तब तक वह पिता की बेटी रहती है, लेकिन उसकी शादी के बाद उसे परिवार में अब बेटी नहीं माना जाता है; उसे पति के घर जाना चाहिए, क्योंकि शादी के बाद वह पति की संपत्ति बन जाती है। मनु-संहिता के अनुसार, एक महिला कभी भी स्वतंत्र नहीं होती है। जब तक उसकी शादी नहीं हो जाती, उसे पिता की संपत्ति बने रहना चाहिए, और जब तक वह बूढ़ी नहीं हो जाती और उसके अपने बड़े हो चुके बच्चे नहीं हो जाते, तब तक उसे पति की संपत्ति बने रहना चाहिए। वृद्धावस्था में, जब पति संन्यास ले चुका होता है और घर छोड़ चुका होता है, तब भी वह पुत्रों की संपत्ति बनी रहती है। एक महिला हमेशा पिता, पति या बड़े बेटों पर ही निर्भर रहती है। यह देवहूति के जीवन में प्रदर्शित होगा। देवहूति के पिता ने पति कर्दम मुनि को उसकी जिम्मेदारी सौंप दी, और उसी तरह, कर्दम मुनि ने भी अपने पुत्र कपिलादेव को जिम्मेदारी देकर घर छोड़ दिया। यह कथा इन घटनाओं का वर्णन एक के बाद एक करेगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)