श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 22: कर्दममुनि तथा देवहूति का परिणय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.22.18 
तां प्रार्थयन्तीं ललनाललाम-
मसेवितश्रीचरणैरद‍ृष्टाम् ।
वत्सां मनोरुच्चपद: स्वसारं
को नानुमन्येत बुधोऽभियाताम् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कौन पुरुष होगा जो स्त्रियों में शिरोमणि, स्वायंभुव मनु की पुत्री और उत्तानपाद की बहन का आदर नहीं करेगा? जिन लोगों ने कभी श्रीलक्ष्मी जी के चरणों की पूजा नहीं की है, उन्हें तो दर्शन तक नहीं मिल सकता है, ऐसे में वो स्वेच्छा से मेरी हाफ पार्टनर बनने आई है।
 
Who is there who will not respect the goddess of all women, the daughter of Svayambhuva Manu and the sister of Uttanapada? Those who have never worshipped the feet of Shri Lakshmi cannot even see her, yet she has come willingly to become my better half.
तात्पर्य
कार्दम मुनि ने देवहूति की सुंदरता और योग्यता की विविध प्रकार से प्रशंसा की। देवहूति वास्तव में सभी सुशोभित सुंदर लड़कियों का आभूषण थीं। कोई लड़की अपने शरीर पर गहने पहनकर सुंदर बन जाती है, परंतु देवहूति गहनों से भी अधिक सुंदर थीं; उन्हें सुशोभित सुंदर लड़कियों का आभूषण माना जाता था। देवता और गंधर्व उनकी सुंदरता के प्रति आकर्षित थे। कार्दम मुनि, यद्यपि एक महान ऋषि थे, स्वर्गलोक के निवासी नहीं थे, परंतु पिछले श्लोक में उल्लेख किया गया है कि स्वर्ग से आए विश्वावसु भी देवहूति की सुंदरता से आकर्षित हो गए थे। अपनी व्यक्तिगत सुंदरता के अतिरिक्त, वह सम्राट स्वायंभुव की पुत्री और राजा उत्तानपाद की बहन थीं। ऐसी लड़की के हाथ को कौन मना कर सकता था?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)