यह सब होने के बावजूद, हे प्रतापी राजा, मैं आपसे यहाँ आगमन का कारण पूछ रहा हूँ। वह चाहे जो भी हो, हम बिना विचलित हुए उसे पूरा करेंगे।
Still, O mighty king, I ask you the reason for your coming here. Whatever it may be, we shall fulfill it without hesitation.
तात्पर्य
जब कोई अतिथि किसी मित्र के घर आता है, तो यह समझा जाता है कि उसका कुछ विशेष उद्देश्य है। कार्दम मुनि समझ सकते थे कि स्वायंभुव जैसे महान राजा, हालाँकि वे अपने राज्य की स्थिति का निरीक्षण करने जा रहे थे, उनके आश्रम में आने का कुछ विशेष उद्देश्य हो सकता है। इस प्रकार उन्होंने राजा की इच्छा को पूरा करने के लिए खुद को तैयार किया। पहले यह रिवाज था कि ऋषि राजाओं के पास जाते थे और राजा ऋषियों के आश्रमों में जाते थे; प्रत्येक दूसरे के उद्देश्य को पूरा करने के लिए खुश होता था। इस पारस्परिक संबंध को भक्ति-कार्य कहा जाता है। ब्राह्मण और क्षत्रिय (क्षत्रं द्विजत्वं) के बीच परस्पर लाभकारी हितों के संबंध का वर्णन करने वाला एक अच्छा श्लोक है। क्षत्रं का अर्थ है "शाही आदेश," और द्विजत्वं का अर्थ है "ब्राह्मणिक आदेश।" दोनों पारस्परिक हित के लिए थे। शाही आदेश समाज में आध्यात्मिक उन्नति की खेती के लिए ब्राह्मणों को सुरक्षा प्रदान करेगा, और ब्राह्मण शाही आदेश को अपना बहुमूल्य निर्देश देंगे कि राज्य और नागरिकों को आध्यात्मिक पूर्णता में धीरे-धीरे कैसे ऊपर उठाया जा सकता है।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध तीन के अंतर्गत इक्कीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥