श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 21: मनु-कर्दम संवाद  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.21.5 
रुचिर्यो भगवान् ब्रह्मन्दक्षो वा ब्रह्मण: सुत: ।
यथा ससर्ज भूतानि लब्ध्वा भार्यां च मानवीम् ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
हे ऋषि, कृपा करके मुझे बताएँ कि ब्रह्मा के पुत्र दक्ष और पूजनीय रुचि ने स्वायंभुव मनु की अन्य दो कन्याओं को पत्नी रूप में प्राप्त करके किस प्रकार संतान उत्पन्न कीं?
 
O Sage, kindly tell me how Brahma's sons, Daksha and Ruchi, after accepting the other two daughters of Svayambhuva Manu as their wives, begot children?
तात्पर्य
सृष्टि के प्रारंभ में जनसंख्या को बढ़ाने वाले सभी महान व्यक्तियों को प्रजापति कहा जाता है। ब्रह्मा को भी प्रजापति के रूप में जाना जाता है, जैसा कि उनके कुछ बाद के पुत्रों को भी कहा जाता है। स्वायंभुव मनु को भी प्रजापति के रूप में जाना जाता है, जैसा कि ब्रह्मा के एक और पुत्र दक्ष को भी कहा जाता है। स्वायंभुव की दो पुत्रियां थीं, आकूति और प्रसूति। प्रजापति रुचि ने आकूति से विवाह किया, और दक्ष ने प्रसूति से। इन जोड़ों और उनके बच्चों ने संपूर्ण ब्रह्मांड को आबाद करने के लिए अपार संख्या में बच्चे पैदा किए। विदुर की जिज्ञासा थी, "उन्होंने प्रारंभ में जनसंख्या कैसे उत्पन्न की?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)