श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 21: मनु-कर्दम संवाद  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.21.48 
अथोटजमुपायातं नृदेवं प्रणतं पुर: ।
सपर्यया पर्यगृह्णात्प्रतिनन्द्यानुरूपया ॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
राजा को अपने आश्रम में आते और प्रणाम करते देख, उस ऋषि ने उन्हें आशीर्वाद देकर प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया और यथोचित सम्मान दिया।
 
Seeing the king coming to his ashram and paying his respects, the sage welcomed him with his blessings and welcomed him with due respect.
तात्पर्य
साम्राट स्वायम्भुव मनु केवल सूखे पत्तों की झोपड़ी में रहने वाले ऋषि कर्दम के पास नहीं गए बल्कि उनको पूरे सम्मान के साथ प्रणाम भी किए। इसी तरह, राजाओं के लिए यह कर्तव्य होता था कि वे जंगल में उनके आश्रम में आने वाले राजाओं को आशीर्वाद दिया करें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)