श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 21: मनु-कर्दम संवाद  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  3.21.42-43 
कदम्बचम्पकाशोककरञ्जबकुलासनै: ।
कुन्दमन्दारकुटजैश्चूतपोतैरलङ्कृतम् ॥ ४२ ॥
कारण्डवै: प्लवैर्हंसै: कुररैर्जलकुक्‍कुटै: ।
सारसैश्चक्रवाकैश्च चकोरैर्वल्गु कूजितम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
बिन्दु-सरोवर कदम्ब, चंपक, अशोक, करंज, बकुला, आसन, कुंद, मंदार, कुटज और युवा आम के पेड़ों से सजा हुआ था। हवा में कारंडव, प्लव, हंस, कुरी, जलपक्षी, सारस, चक्रवाक और चकोर की सुंदर आवाजें गूंज रही थीं।
 
बिन्दु-सरोवर कदम्ब, चंपक, अशोक, करंज, बकुला, आसन, कुंद, मंदार, कुटज और युवा आम के पेड़ों से सजा हुआ था। हवा में कारंडव, प्लव, हंस, कुरी, जलपक्षी, सारस, चक्रवाक और चकोर की सुंदर आवाजें गूंज रही थीं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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