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श्लोक 3.21.31  |
कृत्वा दयां च जीवेषु दत्त्वा चाभयमात्मवान् ।
मय्यात्मानं सह जगद् द्रक्ष्यस्यात्मनि चापि माम् ॥ ३१ ॥ |
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| अनुवाद |
| सभी जीवों के प्रति दयालुता दिखाकर तुम आत्म-साक्षात्कार प्राप्त कर सकोगे। फिर सबको भयमुक्त करने का वचन देने से तुम अपने सहित समस्त जगत को मुझमें और मुझे अपने में स्थित देख सकोगे। |
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| सभी जीवों के प्रति दयालुता दिखाकर तुम आत्म-साक्षात्कार प्राप्त कर सकोगे। फिर सबको भयमुक्त करने का वचन देने से तुम अपने सहित समस्त जगत को मुझमें और मुझे अपने में स्थित देख सकोगे। |
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