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श्लोक 3.21.30  |
त्वं च सम्यगनुष्ठाय निदेशं म उशत्तम: ।
मयि तीर्थीकृताशेषक्रियार्थो मां प्रपत्स्यसे ॥ ३० ॥ |
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| अनुवाद |
| मेरी आज्ञा का पूर्ण रूप से पालन करके और अपने सभी कर्मों के फल को समर्पित करके तुम अपने हृदय को शुद्ध करोगे और अंततः मुझ तक पहुँचोगे। |
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| मेरी आज्ञा का पूर्ण रूप से पालन करके और अपने सभी कर्मों के फल को समर्पित करके तुम अपने हृदय को शुद्ध करोगे और अंततः मुझ तक पहुँचोगे। |
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