श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 21: मनु-कर्दम संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.21.2 
प्रियव्रतोत्तानपादौ सुतौ स्वायम्भुवस्य वै ।
यथाधर्मं जुगुपतु: सप्तद्वीपवतीं महीम् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
स्वायम्भुव मनु के दो महान पुत्र—प्रियव्रत और उत्तानपाद—ने धर्म के नियमों का पालन करते हुए सात द्वीपों वाले इस संसार पर शासन किया।
 
Svayambhuva Manu's two sons—Priyavrata and Uttanapada—ruled this world consisting of the seven islands according to religious rules.
तात्पर्य
श्रीमद् भागवतम ब्रह्मांड के विभिन्न भागों में राज करनेवाले महान राजाओं का इतिहास भी है। इस श्लोक में स्वायम्भुव मनु के पुत्रों प्रियव्रत और उत्तमपाद के नामों का उल्लेख मिलता है। उन्होंने इस पृथ्वी पर राज किया जो कि सात द्वीपों में विभाजित है। ये सात द्वीप वर्तमान समय में भी एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और उत्तर व दक्षिण ध्रुव के नाम से विद्यमान है। श्रीमद् भागवतम में सभी भारतीय राजाओं का कालानुक्रमिक इतिहास तो नहीं है, परन्तु अति महत्वपूर्ण राजाओं जैसे प्रियव्रत और उत्तमपाद और अन्य कई महान राजाओं के कार्यो का वर्णन मिलता है। इसमें भगवान रामचन्द्र और महाराज युधिष्ठिर जैसे राजाओं का भी वर्णन मिलता है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ऐसे धार्मिक राजाओं के कार्यो के बारे में सुनने से व्यक्ति का कल्याण होता है और लोगों को उनके इतिहास का अध्ययन करने से लाभ हो सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)