न तेऽजराक्षभ्रमिरायुरेषां
त्रयोदशारं त्रिशतं षष्टिपर्व ।
षण्नेम्यनन्तच्छदि यत्त्रिणाभि
करालस्रोतो जगदाच्छिद्य धावत् ॥ १८ ॥
अनुवाद
तेरी तीन नाभि वाला काल चक्र अजर ब्रह्म की धुरी पे घूम रहा है। इसमे तेरह अरे, ३६० जोड़, छह परिक्रमा और उसपर अनंत पत्तियाँ पिरोयी हुई हैं। यद्यपि इसके घूमने से सारी सृष्टि की जीवन अवधि घट जाती है, पर ये प्रचंड वेग वाला चक्र भगवान के भक्तों की आयु को स्पर्श नहीं कर सकता।
Your three-naveled (time) wheel is rotating around the axis of the immortal Brahma. It has thirteen spokes (are), 360 joints, six circumferences and infinite leaves (pattar) are strung on it. Although its rotation reduces the life span of the entire universe, this extremely fast wheel cannot touch the age of the devotees of God.
तात्पर्य
समय कारक भक्तों की जीवन अवधि को प्रभावित नहीं कर सकता| भगवद-गीता में कहा गया है की भक्ति सेवा के थोड़े से पालन से ही व्यक्ति को सबसे बड़े खतरे से बचाया जा सकता है| सबसे बड़ा खतरा एक शरीर से दूसरे शरीर में आत्मा का भ्रमण है, और केवल भगवान में भक्ति सेवा से ही यह प्रक्रिया रुक सकती है| वैदिक साहित्य में कहा गया है, हरि विना न मृतिम तरन्ति: बिना भगवान की कृपा के, कोई भी जन्म और मृत्यु के चक्र को नहीं रोक सकता| भगवद-गीता में कहा गया है की केवल भगवान और उनके कार्यों की दिव्य प्रकृति को समझने से, उनकी उपस्थिति और उनके गायब होने से मृत्यु के चक्र को रोका जा सकता है और उन्हें वापस जाया जा सकता है| समय कारक पलों, घंटों, महीने, साल, अवधि, मौसम, आदि कई अंशों में बंटा हुआ है| इस पद में सभी विभाग वैदिक साहित्य के खगोलीय गणनाओं के अनुसार निर्धारित किये गए है| छः मौसम है, जिन्हें ऋतु कहा जाता है, और चार महीने की अवधि होती है जिन्हें चातुर्मास्य कहा जाता है| चार महीने की तीन अवधियों से एक साल पूरा होता है| वैदिक खगोलीय गणनाओं के अनुसार, तेरह महीने होते है| तेरहवां महीना अधि-मास या मला-मास कहा जाता है और हर तीसरे साल जोड़ा जाता है| हालाँकि, समय कारक भक्तों के जीवनकाल को छू नहीं सकता| दूसरे पद में कहा गया है की जब सूर्य उदय और अस्त होता है तब वह सभी जीवित प्राणियों का जीवन ले जाता है, लेकिन यह उन लोगों का जीवन नहीं ले सकता जो भक्ति सेवा में लगे हुए हैं| यहाँ समय की तुलना एक बड़े पहिये से की गयी है जिसमे 360 जोड़ है, मौसम के रूप में छः रिम्स है, और क्षणों के रूप में अनगिनत पत्ते है| यह शाश्वत अस्तित्व, ब्रह्म पर घुमता है|
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥