कर्दम मुनि इसलिए एक ऐसी पत्नी चाहते थे जिसकी प्रवृति उनकी तरह की हो क्योंकि आध्यात्मिक और भौतिक उन्नति में सहायता के लिए पत्नी ज़रूरी होती है। यह कहा जाता है कि एक पत्नी सभी इच्छाओं को धर्म, आर्थिक विकास और इंद्रिय संतुष्टि में पूरा करती है। यदि किसी के पास एक अच्छी पत्नी है, तो उसे सबसे भाग्यशाली पुरुष माना जाना चाहिए। ज्योतिष में, उस पुरुष को भाग्यशाली माना जाता है जिसके पास बहुत अधिक धन, बहुत अच्छे बेटे या बहुत अच्छी पत्नी हो। इन तीनों में से, जिसके पास एक बहुत अच्छी पत्नी है, उसे सबसे भाग्यशाली माना जाता है। विवाह करने से पहले, व्यक्ति को अपनी तरह की प्रवृति वाली पत्नी का चयन करना चाहिए और इंद्रिय संतुष्टि के लिए तथाकथित सुंदरता या अन्य आकर्षक विशेषताओं पर मोहित नहीं होना चाहिए। भागवत के बारहवें कांड में कहा गया है कि कलि-युग में विवाह कामुक जीवन के विचार पर आधारित होगा; जैसे ही कामुक जीवन में कमी आएगी, तलाक का सवाल उठेगा।
कर्दम मुनि उमा से अपना वरदान मांग सकते थे, क्योंकि शास्त्रों में यह अनुशंसा की गई है कि अगर कोई अच्छी पत्नी चाहता है, तो उसे उमा की आराधना करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने भगवान के परम व्यक्तित्व की पूजा करना पसंद किया क्योंकि भागवत में यह अनुशंसा की गई है कि हर कोई, चाहे वह इच्छाओं से भरा हो, उसकी कोई इच्छा न हो या वह मुक्ति चाहता हो, उसे भगवान की पूजा करनी चाहिए। मनुष्यों के इन तीन वर्गों में से, एक भौतिक इच्छाओं की पूर्ति करके खुश रहने की कोशिश करता है, दूसरा परम के साथ एक होकर खुश रहना चाहता है, और एक और, परिपूर्ण पुरुष, एक भक्त है। वह भगवान के व्यक्तित्व से कुछ भी बदले में नहीं चाहता है; वह केवल पारलौकिक प्रेममय सेवा करना चाहता है। किसी भी मामले में, हर किसी को भगवान के परम व्यक्तित्व की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि वह सबकी इच्छा को पूरा करेगा। सर्वोच्च व्यक्तित्व की पूजा करने का लाभ यह है कि भले ही किसी में भौतिक भोग की इच्छाएँ हों, अगर वह कृष्ण की पूजा करता है, तो वह धीरे-धीरे एक शुद्ध भक्त बन जाएगा और उसमें अब और भौतिक लालसा नहीं रहेगी।
