विदुर उवाच
स्वायम्भुवस्य च मनोर्वंश: परमसम्मत: ।
कथ्यतां भगवन् यत्र मैथुनेनैधिरे प्रजा: ॥ १ ॥
अनुवाद
विदुर ने कहा: स्वयंभू मनु की वंश परंपरा अति सम्माननीय थी। हे पूजनीय ऋषि, मेरी आपसे प्रार्थना है कि इस वंश का वर्णन करें जिसकी संतानें संभोग के द्वारा बढ़ीं।
Vidura said—Swayambhuva Manu's lineage was very respectable. O revered sage, I request you to describe this lineage whose progeny increased through sexual intercourse.
तात्पर्य
अच्छी जनसंख्या उत्पन्न करने के लिए नियन्त्रित यौन जीवन स्वीकार करने योग्य है। वास्तव में विदुर उन लोगों के इतिहास को सुनने में रुचि नहीं रखते थे जो केवल यौन जीवन में लिप्त थे, लेकिन वे स्वायंभुव मनु की संतान में रुचि रखते थे क्योंकि उस वंश में अच्छे भक्त राजा हुए जो आध्यात्मिक ज्ञान के साथ अपने विषयों की बहुत सावधानी से रक्षा करते थे। इसलिए, उनकी गतिविधियों का इतिहास सुनकर कोई अधिक प्रबुद्ध हो जाता है। इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण शब्द प्रयुक्त किया गया है परम-सम्मतः, जो इंगित करता है कि स्वायंभुव मनु और उनके पुत्रों द्वारा निर्मित संतान को महान अधिकारियों द्वारा अनुमोदित किया गया था। दूसरे शब्दों में, अनुकरणीय जनसंख्या बनाने के लिए यौन जीवन वैदिक धर्मग्रंथ के सभी ऋषियों और अधिकारियों को स्वीकार्य है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥