| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 21: मनु-कर्दम संवाद » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 3.21.1  | विदुर उवाच
स्वायम्भुवस्य च मनोर्वंश: परमसम्मत: ।
कथ्यतां भगवन् यत्र मैथुनेनैधिरे प्रजा: ॥ १ ॥ | | | | | | अनुवाद | | विदुर ने कहा: स्वयंभू मनु की वंश परंपरा अति सम्माननीय थी। हे पूजनीय ऋषि, मेरी आपसे प्रार्थना है कि इस वंश का वर्णन करें जिसकी संतानें संभोग के द्वारा बढ़ीं। | | | | विदुर ने कहा: स्वयंभू मनु की वंश परंपरा अति सम्माननीय थी। हे पूजनीय ऋषि, मेरी आपसे प्रार्थना है कि इस वंश का वर्णन करें जिसकी संतानें संभोग के द्वारा बढ़ीं। | | ✨ ai-generated | | |
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