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bhagavat 3.20.7: नैमिषारण्य के ऋषियों द्वारा इस प्रकार पूछे जाने पर रोमहर्षण के पुत्र, सूत गोस्वामी, जिनका मन भगवान् की दिव्य लीलाओं में लीन था, ने कहा—अब मैं जो कुछ कहूँगा, कृपया उसे सुनें।   |   bhagavat अध्याय 3.20: मैत्रेय-विदुर संवाद   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 20: मैत्रेय-विदुर संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.20.7 
एवमुग्रश्रवा: पृष्ट ऋषिभिर्नैमिषायनै: ।
भगवत्यर्पिताध्यात्मस्तानाह श्रूयतामिति ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
नैमिषारण्य के ऋषियों द्वारा इस प्रकार पूछे जाने पर रोमहर्षण के पुत्र, सूत गोस्वामी, जिनका मन भगवान् की दिव्य लीलाओं में लीन था, ने कहा—अब मैं जो कुछ कहूँगा, कृपया उसे सुनें।
 
On being asked in this manner by the sages of Naimisharanya, Suta Goswami, the son of Romaharshana, whose mind was absorbed in the transcendental pastimes of the Lord, said—Please listen to what I say now.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)