श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 20: मैत्रेय-विदुर संवाद  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.20.38 
प्रहस्य भावगम्भीरं जिघ्रन्त्यात्मानमात्मना ।
कान्त्या ससर्ज भगवान् गन्धर्वाप्सरसां गणान् ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
तब गंभीर भावपूर्ण हँसी हँसते हुए पूज्य ब्रह्मा ने अपनी कान्ति से, जो अपनी सुंदरता का मानो अपने आप आनंद लेती थी, गंधर्व और अप्सराओं के समूह को जन्म दिया।
 
Then, laughing with a deep and emotional laugh, the revered Brahma, from his radiance, who seemed to be enjoying her own beauty, created a group of Gandharvas and Apsaras.
तात्पर्य
उच्च श्रेणी के ग्रह प्रणालियों में संगीतकारों को गंधर्व कहा जाता है, और नर्तकी लड़कियों को अप्सरा कहा जाता है। राक्षसों द्वारा आक्रमण किए जाने और गोधूलि बेला में एक सुंदर स्त्री का रूप धारण करने के बाद, ब्रह्मा ने अगले गंधर्वों और अप्सराओं की रचना की। इंद्रिय तृप्ति में काम आने वाले संगीत और नृत्य को आसुरी स्वीकार किया जाना चाहिए, लेकिन वही संगीत और नृत्य, जब सर्वोच्च भगवान को कीर्तन के रूप में महिमा मंडित करने में काम आता है, तो पारलौकिक हो जाता है, और वे आध्यात्मिक आनंद के लिए पूर्ण जीवन लाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)