Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.20.32: असुरोंने उसकी प्रशंसा की – अहा! ये कैसा रूप है, ये कैसा अप्रतिम धैर्य है, ये कैसा खिलता यौवन है, हम काम से पीडि़त लोगो के बीच भी वो इस तरह विचर रही है मानो उसे काम भाव से कोई सरोकार ही नहीं। | bhagavat अध्याय 3.20: मैत्रेय-विदुर संवाद । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असुरोंने उसकी प्रशंसा की – अहा! ये कैसा रूप है, ये कैसा अप्रतिम धैर्य है, ये कैसा खिलता यौवन है, हम काम से पीडि़त लोगो के बीच भी वो इस तरह विचर रही है मानो उसे काम भाव से कोई सरोकार ही नहीं।
The demons praised her- Oh! what a beauty, what unmatched patience, what budding youth, she is roaming among us lust-stricken people as if she is completely devoid of lust.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥