देवस्तानाह संविग्नो मा मां जक्षत रक्षत ।
अहो मे यक्षरक्षांसि प्रजा यूयं बभूविथ ॥ २१ ॥
अनुवाद
देवताओं के नेता ब्रह्माजी, चिंता से व्याकुल होकर, उनसे निवेदन करने लगे, “मुझे मत खाओ, मेरी रक्षा करो। तुम सब मेरी ही संतान हो और अब तुम मेरे पुत्र बन चुके हो। इसलिए तुम सब यक्ष और राक्षस कहलाओगे।”
Brahma, the head of the gods, got frightened and said to them, “Don't eat me, protect me. You are born from me and you are my sons. Hence you are Yakshas and Rakshasas.”
तात्पर्य
ब्रह्मा के शरीर से उत्पन्न होने वाले राक्षसों को यक्ष और राक्षस कहा जाता था क्योंकि उनमें से कुछ रोते थे कि ब्रह्मा को खाया जाना चाहिए और अन्य रोते थे कि उनकी रक्षा नहीं की जानी चाहिए। जिन्होंने कहा कि उसे खाया जाना चाहिए उन्हें यक्ष कहा जाता था, और जिन्होंने कहा कि उसकी रक्षा नहीं की जानी चाहिए वे राक्षस, मनुष्य भक्षक बन गए। दो, यक्ष और राक्षस, ब्रह्मा द्वारा मूल रचना हैं और आज भी असभ्य पुरुषों में उनका प्रतिनिधित्व किया जाता है जो पूरे ब्रह्मांड में बिखरे हुए हैं। वे अज्ञान के भाव से पैदा होते हैं, और इसलिए, अपने व्यवहार के कारण, उन्हें राक्षस या मनुष्य भक्षक कहा जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥