मन्येऽसुरान् भागवतांस्त्र्यधीशे
संरम्भमार्गाभिनिविष्टचित्तान् ।
ये संयुगेऽचक्षत तार्क्ष्यपुत्र-
मंसे सुनाभायुधमापतन्तम् ॥ २४ ॥
अनुवाद
मैं उन असुरों को, जो भगवान् के विरोधी हैं, उनसे भी ऊपर मानता हूँ जो भगवान् के भक्त हैं, क्योंकि वे सब लोग शत्रुता के भाव से भरे हुए होकर युद्ध करते समय भगवान् को तार्क्ष्य (कश्यप) पुत्र गरुड़ के कंधों पर बैठे हुए और अपने हाथ में चक्रायुध लेकर देख पाते हैं।
I consider the demons who are inimical to the Lord to be superior to the devotees, because all of them, filled with feelings of enmity, can see the Lord sitting on the shoulders of Garuda, the son of Tarkshya (Kashyapa), and holding the Chakrayudha in His hand while fighting.
तात्पर्य
असुर जो भगवान से आमने-सामने लड़े थे, उन्हें मोक्ष प्राप्त हुया क्योंकि भगवान ने उन पर विजय प्राप्त की थी। दानवों का यह उद्धार भगवान के भक्त होने के कारण नहीं हुआ; यह भगवान की निरर्थक दया के कारण हुआ। जो कोई भी भगवान के संपर्क में है, किसी भी तरह, उसे भगवान की विशिष्टता के कारण, उद्धार की प्राप्ती तक पर्याप्त लाभ होते हैं। वह इतने दयालु हैं कि वे अपने शत्रुओं को भी उद्धार पुरस्कार देते हैं क्योंकि वे उनके संपर्क में आते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से उनके वैरपूर्ण विचारों से उनमें समाहित हो जाते हैं। वास्तव में, राक्षस कभी भी शुद्ध भक्तों के बराबर नहीं हो सकते, लेकिन उद्धव इस तरह से सोच रहे थे क्योंकि वे अलगाव की भावनाओं में थे। वह सोच रहे थे कि जीवन के अंतिम चरण में वह शायद भगवान को आमने-सामने नहीं देख पाएंगे जैसा कि दानवों ने किया था। तथ्य यह है कि भक्त जो हमेशा भगवान की भक्ति सेवा में लिप्त रहते हैं, पारलौकिक प्रेम में उन्हें आध्यात्मिक ग्रहों पर ऊपर उठाकर राक्षसों से कई सैंकड़ों और हजारों गुना अधिक पुरस्कृत किया जाता है, जहाँ वे भगवान के साथ शाश्वत आनंदपूर्ण अस्तित्व में रहते हैं। राक्षसों और अनात्मवादियों को भगवान के ब्रह्मज्योति तेज से विलीन होने की सुविधा दी जाती है, जबकि भक्तों को आध्यात्मिक ग्रहों में प्रवेश दिया जाता है। तुलना के लिए, कोई अंतरिक्ष में तैरने और आकाश के ग्रहों में से एक में निवास करने के बीच अंतर की कल्पना कर सकता है। ग्रहों पर रहने वाले जीवों का आनंद उन लोगों से अधिक होता है जिनके पास शरीर नहीं होता है और जो सूर्य की किरणों के अणुओं के साथ विलीन हो जाते हैं। इसलिए, अनात्मवादी भगवान के शत्रुओं से अधिक पक्षपाती नहीं होते हैं; बल्कि, वे दोनों आध्यात्मिक मोक्ष के समान स्तर पर हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥