अवजानन्ति मां मूढा
मानुषीं तनुमाश्रितम्
परं भावमजानन्तो
मम भूता-महेश्वरम्
ज्ञान के खराब कोष वाले व्यक्ति भगवान के व्यक्तित्व, भगवान कृष्ण का, उनकी हर चीज के स्वामी के रूप में उनके उच्च पद को नहीं जानते हुए, अनादर करते हैं। भगवद-गीता में भगवान ने अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से बताई है, लेकिन राक्षसी, नास्तिक विद्यार्थी अपने उद्देश्य के अनुरूप व्याख्या करता है और दुर्भाग्यपूर्ण अनुयायियों को उसी मानसिकता में गुमराह करता है। ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्ति महान ज्ञान पुस्तक से केवल कुछ नारे उठाते हैं, लेकिन भगवान को ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व के रूप में आंकने में असमर्थ होते हैं। हालाँकि, उद्धव जैसे शुद्ध भक्त, ऐसे नास्तिक अवसरवादियों द्वारा कभी भी गुमराह नहीं होते हैं।
