श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 2: भगवान् कृष्ण का स्मरण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.2.19 
द‍ृष्टा भवद्‍‌भिर्ननु राजसूये
चैद्यस्य कृष्णं द्विषतोऽपि सिद्धि: ।
यां योगिन: संस्पृहयन्ति सम्यग्
योगेन कस्तद्विरहं सहेत ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
आपने स्वयं देखा है कि चेदि नरेश (शिशुपाल) ने किस तरह योगाभ्यास में सफलता प्राप्त की यद्यपि वह श्रीकृष्ण से द्वेष करता था। असली योगी भी अपने विभिन्न अभ्यास द्वारा ऐसी सफलता की लालसा करते हैं। जो उनके वियोग को सह सकता है?
 
You have yourself seen how the King of Chedi (Sisupala) achieved success in Yoga practice even though he was jealous of Lord Krishna. Real Yogis also seek such success very well by their various practices. Who can bear their separation?
तात्पर्य

परम कृपाशील प्रभु कृष्ण की दया महाभारत युद्ध के समय महाराज युधिष्ठिर की सभा में स्पष्ट रूप से देखी गई थी। वह अपने शत्रु चेदिराज पर भी दयालु थे, जो हमेशा ईर्ष्या के कारण प्रभु के विरोधी रहते थे। चूँकि प्रभु का सच्चा शत्रु होना असंभव है, इसलिए चेदिराज प्रभु कृष्ण से अत्यधिक द्वेष करते थे। इस प्रकार से वह कंस व जरासंध जैसे असुरों के समान थे। महाराज युधिष्ठिर द्वारा आयोजित राजसूय यज्ञ की खुली सभा में शिशुपाल ने प्रभु कृष्ण का अपमान किया था और अंततः प्रभु के हाथों मारे गए थे। किन्तु सभा में मौजूद सभी लोगों ने देखा कि चेदिराज के शरीर से एक ज्योति निकली और वह प्रभु कृष्ण के शरीर में विलीन हो गई। इसका अर्थ है कि चेदिराज ने परमपिता परमात्मा के साथ एकता प्राप्त करने का उद्धार प्राप्त कर लिया था जो कि ज्ञानियों और योगियों की सर्वोच्च अभिलाषा है और जिसके लिए वह विभिन्न प्रकार की पारलौकिक साधनाएं करते हैं।

यह सत्य है कि जो व्यक्ति मानसिक तर्क अथवा योग की गुह्य शक्तियों के द्वारा अपने व्यक्तिगत प्रयासों से परम सत्य को समझने का प्रयास करते हैं वह वही लक्ष्य प्राप्त करते हैं जिन्हें प्रभु अपने हाथों से मारते हैं। दोनों ही व्यक्ति प्रभु के दिव्य शरीर के ब्रह्मज्योति किरणों में विलीन होने का उद्धार प्राप्त करते हैं। प्रभु अपने शत्रु पर भी कृपालु थे और चेदिराज की सफलता को सभा में उपस्थित सभी लोगों ने देखा था। विदुर भी वहाँ उपस्थित थे, इसलिए उद्धव ने यह घटना उनकी स्मृति को याद दिलाने के लिए कही।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)