श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 2: भगवान् कृष्ण का स्मरण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.2.1 
श्री शुक उवाच
इति भागवत: पृष्ट: क्षत्‍त्रा वार्तां प्रियाश्रयाम् ।
प्रतिवक्तुं न चोत्सेह औत्कण्ठ्यात्स्मारितेश्वर: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जब विदुर ने महान भक्त उद्धव से प्रियतम (श्रीकृष्ण) का सन्देश बताने के लिए कहा तो भगवान की स्मृति में अत्यधिक विचलित होने के कारण उद्धव तुरंत उत्तर नहीं दे पाए।
 
Śrī Sukadeva Gosvāmī said: When Vidura asked the great devotee Uddhava to convey the message of the beloved (Kṛṣṇa), Uddhava was not able to reply immediately due to his great anxiety about the memory of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)